बिल्डिंग मटिरीअल के रूप में कॉंच के लाभ एवं अलाभ

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कॉंच एक जादुई सामग्री है जिसमें अनेक प्रकार के गुणधर्म और उसके भिन्‍न उपयोग हैं जिसके कारण आर्किटेक्‍ट को अनेक डिजाइन और संभावनाएंप्राप्‍त हुई हैं। कॉंच को निर्माण कार्य में अधिकतर एक पारदर्शी चमकीली सामग्री के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है। कॉंच को दरवाजों, खिड़कियों,पार्टिशन आदि जैसी आर्किटेक्‍चरल विशेषताओं के लिए भी इस्‍तेमाल किया जाता है। कॉंच एक पारदर्शी ठोस पदार्थ व सामग्री है जिसे मिट्टी या चीनी-मिट्टी (सेंड और क्‍वार्टज़) सामग्री को ताप देकर सृजित किया जाता है।कॉंच एक अजैविक, पारदर्शीया पारभासी (इनऑर्गेनिक, ट्रासपरेन्‍ट या ट्रांसलुसेन्‍ट मटिरीअल) सामग्री है जिसे किसी भी आकृति में मोल्‍ड किया जा सकता है। कॉंच अनेक कच्‍ची सामग्रियों यानी सिलिका, सोडियम पोटेशियम कार्बोनेट, लाइम या लीड ऑक्‍साइड, मैग्‍नीज ऑक्‍साइड का मिश्रण है जिन्‍हें बुरादा बनाकर, छानकर निर्धारित अनुपातों में मिश्रित करने के उपरांत भट्टी में पिघलाया जाता है।

कॉंच
Courtesy - 123rf

लाभ

  • कॉंच, प्रकाश व रोशनी को अवशोषित, पारेषित और फैलाता है। कॉंच को पारदर्शी या पारभासी बनाया जा सकता है ताकि यह भवन को अनुपम खूबसूरती प्रदान कर सके।
  • कॉंच80% उपलब्‍ध प्राकृतिक प्रकाश को दोनों दिशाओं में फैलाता है, और उसका रंग न तो पीला पड़ता है, न उसमें धुंधलापन होता है, और न ही उस पर प्रतिकूल मौसम का कोई प्रभाव पड़ता है।
  • कॉंच प्रतिकूल मौसम के प्रभावों से पूर्ण रूप से रोधी है, इसलिए यह हवा, बरसात या सूर्य के प्रतिकूल प्रभावों को झेल सकता है और अपनी दिखावट तथा आकृति को कायम रखता है।
  • कॉंच पर जंग नहीं लगती है, इसलिए रासायनिक और आस-पास के पर्यावरणीय प्रभावों से इसका धीरे-धीरे क्षय नहीं होता है।
  • कॉंचकी सतह मुलायम और चमकीली होती है, इसलिए यह धूल रोधी भी है और इसे आसानी से साफ किया जा सकता है।
  • दरवाजे व खिड़कियां बंद होने के बावजूद, कॉंच प्राकृतिक प्रकाश को घर के भीतर आने से नहीं रोकता है, अत: यह ऊर्जा की बचत करता है, बिजली का बिल कम आता है, कमरे को रोशनी प्रदान करता है, घर को एक खूबसूरती प्रदान करता है, और कमरे में रहने वाले व्‍यक्ति की चित्तवृत्ति (मूड) को भी बढ़ाता है।
  • बिजली के विरूद्ध यह एक शानदार ऊष्‍मारोधी है। किसी इलेक्ट्रिक फील्‍ड के प्रभाव के तहत बिजली के करंट को संचालित करना संभव नहीं होता है, पर यह इस कार्य को भी करता है।
  • यह अनेक प्रकार के रंगों में उपलब्‍ध होता है। जब हम बिजली रोधी यूनिटों में कॉंच को संयोजित करते हैं, तब उसका रंग और दिखावट बदल जाती है।
  • इसे पिघलाया, क्‍लांत और किसी भी आकृति में मोड़ा जा सकता है। अत: किसी भवन, दुकान के अग्र भाग, भवन के दरवाजों और खिड़कियों तथा कारखानों सामान्‍य ग्‍लेजिंग कार्यों के लिए इसका इस्‍तेमाल किया जाता है। इसका इस्‍तेमाल फर्नीचर के लिए भी किया जा सकता है, पर उससे पहले फर्नीचर को प्‍लाइवुड या धातू की शीट से लेमिनेट किया जाना जरूरी होता है।
  • किसी प्रोडक्‍ट को प्रदर्शित करने में कॉंच एक आइडियल प्‍लेटफॉर्म उपलब्‍ध कराता है।
  • कॉंचविज्ञान के गहन अध्‍ययन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि फ्यूसन ड्रा मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्रोसेस का प्रयोग करने से उन उद्योगों को,जो सुपिरियर लिक्विड क्रिस्‍टल डिस्‍प्‍ले (एलसीडी) कॉंच जैसे उपकरण बनाते हैं, उन्‍हें काफी लाभ पहुंचा है क्‍योंकि ऐसे डिस्‍प्‍ले वाले उपकरणों ने इलेक्‍ट्रॉनिक गेजेट क्षेत्र में क्रांति ला दी है।
  • कॉंच का 100% पुनर्चक्रण किया जा सकता है और पुनर्चक्रण प्रसंस्‍करण के दौरान इसकी मात्रा घटती नहीं है। इसलिए, इसकी गुणवत्ता या शुद्धता का नुकसान हुए बिना इसे कई बार पुनर्चक्रित किया जा सकता है।
  • कॉंच पर बैंगनी (UV)दृष्टि से स्थिर होता है। चूंकि इस पर परागैंगनी विकिरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, इसलिए इसमें न तो कोई खरोंच/दरार पड़ती है, न रंग फीका पड़ता है और न हीं यह टूटता है।
  • कॉंच, रगड़ व खरोंच से रोधी है।घिसाई की रगड़ व घर्षण और अन्‍य रासायनिक पदार्थों के संपर्क में आने से कॉंचवाली सतह पर कोई निशान व धब्‍बे नहीं पड़ते हैं।
  • कॉंच विभिन्‍न श्रेणियों के तापमानों में स्थिर रहता है, इसलिए इसका उपयोग चिमनी, उच्‍च तापमान वाले लाइट लेंस, और लकड़ी वाले चूल्‍हा, कुकिंग टॉप्‍सतथा उच्‍च तापमान वाले क्षेत्रों के लिए किया जा सकता है, जहॉं कॉंच के फैलाव की आवश्‍यकता कम होती है।
  • इस पर शोर-गुल, वायु, जल और अधिकतर अम्‍लों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, इसलिए इसके रंग, चमक के परिमाण, मुलायमपन, उभारपन, परत और ब्लिसटरिंग में कोई परिवर्तन नहीं होता है। कॉंच, बाह्य बाधाओं को भी रोकता है।
  • कॉंच में सतह को ज्‍यादा आकर्षकता, विशिष्‍टता और खूबसूरती प्रदान करने की सक्षमता होती है। इसका उपयोग अंदरूनी सजावट के लिए वास्‍तुकला दृश्‍यता हासिल करने के लिए किया जाता है।
  • आंतरिक सजावट में कॉंच का इस्‍तेमाल किए जाने से स्‍थान की बचत होती है।
टूटा हुआ कॉंच
Courtesy - 123rf

अलाभ

  • कॉंच के विनिर्माण में कच्‍ची सामग्री के प्रसंस्‍करण के लिए उच्‍च तापमान की आवश्‍यकता होती है जिसके कारण काफी अधिक ऊर्जा व बिजली खर्च होती है, इसलिए यह महंगी सामग्री है और अंतत: इससे निर्माण लागत बढ़ जाती है।
  • कॉंच काफी ठोस और नाज़ुक सामग्री है, और जब इसे दाब पर रखा जाता हैतब यह टूट जाता है। कॉंच के टूटे टूकड़े धारदार होते हैं जिनसे क्षति होने की संभावना काफी अधिक होती है।
  • कॉंच भारी वस्‍तुओं के संघात को नहीं झेल पाता है, इसलिए उसकी भारी-भड़कम वस्‍तु के संघात को झेलने की सक्षमता कमजोर है।
  • कॉंच बाह्य हाइड्रो-फ्ल्‍यूहाइड्रो-फ्ल्‍यूओरिक अम्‍ल से प्रभावित होता है, इसलिए इसकी सतह पर कुछ निशान दिखाई पड़ते हैं।
  • कॉंचक्षार पदार्थों (ऐल्‍कली ऑयन) से भी प्रभावित होता है। क्षार पदार्थों का मिश्रण तब तक कॉंचकी सतह को सामान्‍य रूप से अपघटित करता है, जब तक क्षार पदार्थ की आपूर्ति पर्याप्‍त रहती है। इस प्रकार का अपघटन समान रूप में होता है।
  • कॉंचताप की उच्‍च पारदर्शिता प्रदान करता है, अत: इसकी तुलनात्‍मक न्‍यूनR-वैल्‍यू (एनर्जी सेविंग) के अनुरूप इसे संतुलित किया जाना होता है। R-वैल्‍यू की इन्‍सुलेटिंग के लिए एक महत्‍वपूर्ण कारक के रूप में माना जाता है।
  • कॉंच के उपयोग से सुरक्षा की लागत भी बढ़ती है।
  • कॉंचभूकंप संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भी सुरक्षित नहीं है। यह हकीकत है कि कोई भी कॉंचसामग्री भूकंप रोधी नहीं होती है, लेकिन महंगी लागत के साथ उसे भूकंप के झटकों को झेलने के लिए भी सक्षम बनाया जा सकता है।
  • कॉंच की ताप परिरक्षण क्षमता अच्‍छी नहीं है जिससे एअर-कंडिशनर को चलाने में उच्‍च लागत लगती है।
  • कई लोग ऐसा मानते हैं कि जब आप किसी भवन के अग्रभाग में कॉंच लगा देते हैं, तब आपको कभी भी रंग-रोगन व पेंट करने की जरूरत नहीं पड़ती है, लेकिन यह सच्‍चाई नहीं है। आपको कॉंच की सफाई कराने में बराबर की लागत खर्च करनी पड़ेगी। कभी-कभी तो लागत पेंटिंगसे भी अधिक होती है। पेंटिंग आपको 5 वर्षों में एक बार कराने की जरूरत पड़ेगी, लेकिन कॉंच की सफाई हर साल करानी पड़ेगी।
  • कॉंच ताप को अवशोषित करता है और इसलिए यह एक ग्रीनहाउस के रूप में कार्य करता है। अत: यह गरम और तापीय जलवायु के लिए अनुकूल नहीं है। यह एसी लोड को बढ़ाता है जिसके कारण एअर कंडिशनिंग में अधिक बिजली खर्च होगी।
  • भवनों के अग्रभाग में स्‍थापित कॉंच में चौंध (ग्‍लेर) एक बड़ी समस्‍या है।

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