सीमेंट का ग्रेड क्या होता है

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सीमेंट निर्माण क्षेत्र की आवश्यक इमारत सामग्री है जिसे आधुनिक जमाने मे विशाल रूपसे इस्तेमाल किया जाता है| कांक्रीट, मोर्टार और प्लास्टर इत्यादी के लिये सीमेंट एक अहम सामग्री होती है| ये अलग अलग ग्रेड्स में उपलब्ध हैं| कांक्रीट मिक्स की ताकत सीमेंट की ग्रेडपर निर्भर होती है| इसलिये सीमेंट ग्रेड की जानकारी होना और आपके घर के निर्माण पर उसका होनेवाला असर जानना जरूरी है|  यहॉं हमने सींमेंट के ग्रेड के बारे में और उसके इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी है| भारत में  सामान्यत: तीन ग्रेड की सीमेंट बाजार में उपलब्ध है| ३३ ग्रेड, ४३ ग्रेड और ५३ ग्रेड की सीमेंट उपलब्ध है|

सीमेंट का ग्रेड
Courtesy - 123rf

सीमेंट के ग्रेड से सामान्यत: उसकी मजबूती के फर्क का संकेत किया जाता है| सीमेंट की दृढता को सामान्य रूप से कॉम्प्रेसिव स्ट्रेंथ के रूप में मापा जाता है| सीमेंट की स्ट्रेंथ यानि एक सामान्य क्यूब (चौकोन रचना) पे २८ दिन की तराई के बाद की ताकत याने कॉम्प्रेसिव स्ट्रेंथ| कॉम्प्रेसिव स्ट्रेंथ को मेगा पास्कल (एमपीए) या एन/एनएम२ में मापा जाता है|

बाजार में तीन दर्जे (ग्रेड्स) के सीमेंट उपलब्ध हैं|

३३ – ग्रेड सीमेंट

३३- ग्रेड सीमेंट यानी सीमेंट की कॉम्प्रेसिव स्ट्रेंथ २८ दिन के बाद मानक स्थितियों में भारतीय मानकों के अनुसार परखे जाने पर ३३ एन/एनएम२ होती है|

इस प्रकार के सीमेंट का उपयोग सामान्य पर्यावरणीय स्थितियों में सामान्य निर्माण कार्य के लिए किया जाता है| यह एम २० के उपर के कांक्रीट ग्रेड के लिये शायद अनुकूल नही हो सकता| उच्च दर्जे के सीमेंट्सकी उपलब्धता के कारन, ३३ ग्रेड के सीमेंट का इस्तेमाल कम हो गया है| आजकल ३३ ग्रेड सीमेंट का बहुत कम उत्पादन होता है|

४३- ग्रेड सीमेंट

४३- ग्रेड सीमेंट यानी सीमेंट की कॉम्प्रेसिव स्ट्रेंथ २८ दिन के बाद मानक स्थितियों में भारतीय मानकों के अनुसार परखे जाने पर ४३ एन/एनएम२ होती है|

इस प्रकार के सीमेंट का उपयोग सादे कांक्रीट के काम और प्लास्टरिंग के  कार्य के लिए किया जाता है| यह एम३० तक के कांक्रीट मिक्स के लिये अनुकूल होता है| ४३ ग्रेड सीमेंट टाईल्स, ब्लॉक्स, पाईप्स इत्यादि| जैसी प्रीकास्ट चीजें बनाने के लिये भी होता है| जहॉं सेटींग का वक्त आवश्यक मानक नही होता वहॉं इसे इस्तेमाल किया जा सकता है|

५३- ग्रेड सीमेंट

५३- ग्रेड सीमेंट यानी सीमेंट की कॉम्प्रेसिव स्ट्रेंथ २८ दिन के बाद मानक स्थितियों में भारतीय मानकों के अनुसार परखे जाने पर ५३ एन/एनएम२ होती है| ४३ ग्रेड सीमेंट के मुकाबले ५३ ग्रेड सीमेंट जल्दी सेट होता है|

इस प्रकार के सीमेंट का उपयोग सामान्य कार्य के लिए नहीं किया जाता है| अधिकतर इसका उपयोग ढांचागत प्रयोजनों के लिए रीइन्फोर्स्ड सीमेंट कांक्रीट के लिए किया जाता है|५३ ग्रेड सीमेंट एम २५ से ऊपर के कांक्रीट मिक्स बनाने के लिये उपयोगी है. इसे प्रीस्ट्रेस्ड कांक्रीट के लिये भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

सीमेंट का उपयोग करने से पहले उसकी मजबूती को जॉंचना बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि असल में यह आपके ढांचे की मजबूती को प्रभावित करता है| यदि आप किसी विशिष्ट कार्य के लिए उपयुक्त ग्रेड के सीमेंट का उपयोग नहीं करते हैं तो आपको अपनी डिजाइन की मजबूती कभी नहीं मिलेगी|

आजकल नई बेहतर तकनीकों के आ जाने से अधिक मजबूती वाले सीमेंट का उत्पादन करना संभव हो गया है| लेकिन आपको ईंट या गारे जैसे प्लास्टर, फ्लोरिंग इ. के लिए हर जगह पर अधिक मजबूती की जरूरत नहीं होती|

अधिकतर ५३ ग्रेड ऑर्डिनरी पोर्टलैंड सीमेंट का उपयोग निर्माण उद्योग में किया जाता है| आजकल ऐसे बहुत ही कम उत्पादक होते हैं जो ३३ ग्रेड सीमेंट और ४३ ग्रेड सीमेंट का उत्पादन करते हैं|

ऐसे मामले में जब ३३ और ४३ ग्रेड सीमेंट उपलब्ध नहीं होता है तब पीपीसी का चयन किया जा सकता है जहां लागत थोडी कम होती है|

मिनी प्लांट्स सामान्य रूप से ३३/४३ ग्रेड सीमेंट का उत्पादन करते हैं| इसलिये अपना घर बनाने के लिये, इस्तेमाल के अनुसार सीमेंट खरीदते वक्त होशियारीसे अपनी सीमेंट ग्रेड का चयन किजीये!

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Comments (2)

    1. Dear N. N. Chaudhari
      Thank you for contacting Gharpedia.
      By the grade of cement as 33/43/53, the values 33/43/53 indicates the compressive strength of cement cube in Mpa (N/mm2) after 28 days of curing, where cement mould size is 7.06*7.06*7.06.
      However, it would be good to understand the logic and basis of arriving at such values. Please note that these are not constant values. These 33/43/53 values are arbitrary and empirical values and they will keep on changing. Empirical means, these values are chosen after numbers of the experiments which are reliable.
      These values are supposed to change which means that there is no one value for compressive strength of cement like the density or specific gravity. There are many reasons due to which these values will change. i.e.
      •If the size of the cubes is changed, i.e. if the cube size increased or decreased these values supposed to change.
      •If the shape of the specimens is changed,
      •Even when the methods are changed,
      •If days of curing are changed i.e. if the cube is tested as at 15 days or 45 days, the strength will change.
      These values are empirical derived after conducting numbers of experiments according to the specified methods and equipment based on many prevalences. After that, they have been standardized
      They are based on certain basic minimum requirements of compressive strength for concrete or mortar. They are based on normal and general minimum strength required of concrete or mortar for which a particular minimum strength of cement is also needed.
      Various experimental methods are described in standard guidelines. These standard guidelines also vary according to the nation and different for every material. Standard but different guidelines for specification are also available for different grades of cement like,
      •IS 269:1989 for 33 grade, ordinary portland cement.
      •IS 8112: 2013 for 43 grade, ordinary portland cement.
      •IS 12269: 2013 for 43 grade, ordinary portland cement.
      Standardization of grade is needed for maintaining the uniformity and making operations smooth all over the nation. It also gives the idea about which types of cement should be used for a particular purpose and how much cement is required to achieve the desired strength of concrete/mortar.
      Summering up, there is a particular reason for giving these particular number. It was perhaps, the engineer’s judgement or choice to select the value which could have varied to some extent here or there.
      Thanking You
      Gharpedia Team

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