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सीमेंट के निर्माण के लिए वेट प्रोसेस (गिली प्रक्रिया) की जानकारी

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सीमेंट निर्माण की वेट प्रोसेस (गिली प्रक्रिया) में चोक का इस्तेमाल किया जाए, तो उसे पहले बारीक रूप से तोड़ दिया जाता है और फिर वोश मिल में पानी में फैलाया जाता है। वॉश मिल एक गोलाकार गड्ढा है, जिस में पांचे वाले अर्धव्यास आकार के घूमने वाले हत्थे है, जो सख्त पदार्थों को टुकड़ों में तोड़ते हैं। उसी वॉश मिल में चिकनी मिट्टी को भी तोड़कर पानी में मिलाया जाता है। अब दोनों मिश्रण को पूर्व निर्धारित मात्रा में मिश्रित करने के लिए पंप किया जाता है और जालियों की श्रृंखला से प्रसार किया जाता है। परिणामी सीमेंट slurry भंडारण टैंक में जाती है।

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सीमेंट निर्माण की वेट प्रोसेस (गिली प्रक्रिया)

जब चूने के पत्थर का इस्तेमाल किया जाए, तो पहले उसे विस्फोट करके एक के बाद एक ऐसे छोटे क्रशर में पीसा जाता है और फिर बॉल चक्की में पानी में फैलाई हुई चिकनी मिट्टी के साथ मिलाया जाता है। प्राप्त हुए slurry को भंडारण टेंक में डाला जाता है।

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Slurry एक मलाईदार स्थिर द्रव्य होता है, जिसमें 35 से 50% पानी की मात्रा होती है और पदार्थ का कुछ छोटा अंश छलनी के 90 μm आकार से 2% बड़ा होता है। Slurry को रखने के लिए कई भंडारण टेंक उपलब्ध किए जाते हैं। निलंबित पदार्थों को यांत्रिक हिलाने वाले मशीन या कोम्प्रेसेड हवा से बुलबुलो द्वारा रोका जाता है।

सीमेंट निर्माण की वेट प्रोसेस (गिली प्रक्रिया)

चूने की इच्छित मात्रा वाली slurry घूमनेवाली भट्ठी से प्रसार होती है। यह एक बड़ा, आग रोकने वाला 8 मीटर के व्यास का स्टील का सिलिंडर होता है, और कभी-कभी 230 मीटर जितना लंबा भी होता है। स्टील सिलिंडर धीरे-धीरे अपनी धुरी पर घूमता है और यह समस्तरीय से थोड़ा सा झुका हुआ होता है। भट्ठी के ऊपरी छोर से घोल को अंदर डाला जाता है और भट्ठी के नीचे के छोर से मसले हुए कोयले को हवा के झोंके द्वारा अंदर डाला जाता है, जहां तापमान 1450 डिग्री सेल्सियस होता है। भट्ठी में इस्तेमाल किए जाने वाले कोयले में राख की मात्रा ज्यादा नहीं होनी चाहिए क्योंकि 1 टन सीमेंट बनाने के लिए 220 किलो कोयले का इस्तेमाल होता है। सीमेंट की मात्रा को ध्यान में रखते हुए यह योग्य है।

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भट्ठी के सबसे गर्म हिस्से में सूखा पदार्थ रासायनिक प्रतिक्रियाओं की श्रृंखला से गुजरता है और पदार्थ का कुछ 20 से 30% हिस्सा द्रव्य बन जाता है, और चुना, सिलिका और एलुमिना फिर से जुड़ जाते हैं। पिघले हुए ढेर से क्लिंकर नामक 3 से 25 मिलीमीटर व्यास के गोले बन जाते हैं। क्लिंकर को कूलर में गिराया जाता है, जहां उन्हें नियंत्रित अवस्था में ठंडा किया जाता है। ठंडे किए हुए क्लिंकर और 3 से 5% जिप्सम को आवश्यक बारीकी के अनुसार बॉल मिल में पीसा जाता है, और फिर भंडारण साइलो में ले जाया जाता है, जहां सीमेंट को थैलियों में भरा जाता है।स्थिर दौर और क्लिंकर की समानता को सुनिश्चित करने के लिए भट्ठी का लगातार चलना जरूरी है। सीमेंट निर्माण की गिली प्रकिया (वेट प्रोसेस  ) के कारखाने में सबसे बड़ी भट्ठी प्रतिदिन 3600 टन क्लिंकर का उत्पादन करती है।

सीमेंट निर्माण की वेट प्रोसेस (गिली प्रक्रिया) में ऊर्जा का काफी उपयोग होता है, और इसीलिए ड्राइ प्रक्रिया और सेमी-ड्राइ प्रक्रिया के मुकाबले खर्चीली है।

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